चंडीगढ़, 6 अगस्त। पंजाब के जल संसाधन एवं खनन तथा भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज भाखड़ा बांध की संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी फैलाई जा रही अफ़वाहों एवं अटकलों को सिरे से खारिज़ करते हुए स्पष्ट किया कि भाखड़ा बांध पूरी तरह सुरक्षित है और पंजाब के लोगों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पंजाब विधानसभा में शून्यकाल के दौरान बोलते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि कुछ भ्रामक रिपोर्टों के कारण लोगों में अनावश्यक दहशत पैदा हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांध में होने वाली अस्थायी गतिविधि इसके इंजीनियरिंग डिजाइन का ही एक हिस्सा है। इसके अलावा उन्होंने खनन क्षेत्र में पंजाब सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि, सुधारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और राज्य के खनिजों की खोज के लिए नए प्रयास शामिल हैं।
भाखड़ा बांध के झुक जाने संबंधी कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि ऐसी गलत एवं भ्रामक रिपोर्टों के कारण पंजाब के लोगों में अनावश्यक दहशत फैलाई गई है। उन्होंने कहा कि भाखड़ा बांध दुनिया के सर्वोत्तम इंजीनियरिंग नमूनों में से एक है, जिसके शानदार डिजाइन और इंजीनियरिंग मानदंडों की अमेरिका और कनाडा सहित कई देशों के विशेषज्ञ भी प्रशंसा करते हैं।
जल संसाधन मंत्री ने बताया कि बांध को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि पानी का दबाव बढ़ने पर इसमें मामूली सा झुकाव आता है और दबाव कम होने पर यह फिर अपनी मूल स्थिति में आ जाता है। उन्होंने कहा कि पानी के दबाव के कारण बांध में 1.03 इंच का झुकाव इसके इंजीनियरिंग डिज़ाइन की निर्धारित सीमाओं के भीतर है। वर्ष 1995 से 2025 तक बांध में इस प्रकार की हलचल 15 बार दर्ज की गई और हर बार बांध अपनी सामान्य स्थिति में सुरक्षित वापस आ गया।
श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि वर्ष 2025 में दर्ज की गई हालिया गतिविधि भी बांध के सामान्य संरचनात्मक व्यवहार का ही हिस्सा थी और यह किसी भी प्रकार की कमज़ोरी या ख़तरे का संकेत नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफ़वाहों और ग़लत सूचनाओं से भ्रमित न हों क्योंकि भाखड़ा बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
गाद जमा होने संबंधी आशंकाओं का उत्तर देते हुए कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमा हुई गाद बांध की दीवार से लगभग 12 किलोमीटर ऊपर वाले हिस्से में मौजूद है और इसका बांध की संरचनात्मक सुरक्षा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि करीब 26 प्रतिशत सिल्ट जमा होने के कारण भंडारण क्षमता अवश्य घटी है, लेकिन इसका बांध की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि गाद निकालने की ज़िम्मेदारी भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) और केंद्र सरकार की है।
जल संसाधन मंत्री ने कहा, ”पंजाब ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) की बैठकों के दौरान डी-सिल्टिंग का मुद्दा लगातार उठाया गया है।” उन्होंने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में बी.बी.एम.बी. और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उनसे जल्द से जल्द डी-सिल्टिंग का काम शुरू करने की अपील की है क्योंकि यह उनकी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि गाद हटाने से जल भंडारण क्षमता पुनः बहाल होगी और पानी की उपलब्धता में भी वृद्धि होगी।
खनन संबंधी विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का उत्तर देते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने इन आरोपों को पूर्णतः निरस्त किया और कहा कि पंजाब खनन सुधारों के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष, मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान आए ऐतिहासिक बदलाव को नज़रअंदाज़ कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों के समय खनन से प्राप्त राजस्व करीब 120 करोड़ रुपए था, जो अब आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान चालू वित्तीय वर्ष में बढ़कर 825 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है।
उन्होंने सदन को यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा खनन सुधारों के मूल्यांकन में पंजाब ने अपनी श्रेणी में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इन सुधारों के कारण राज्य को भारत सरकार द्वारा 200 करोड़ रुपए का प्रशंसा पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार राज्य सरकार द्वारा पारदर्शिता, जवाबदेही और प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी एवं सुचारू प्रबंधन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
श्री गोयल ने बताया कि पंजाब सरकार ने अवैध खनन के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति अपनाई हुई है। जब भी शिकायतें प्राप्त होती हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी जाती है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की जाती है। उन्होंने आगे कहा कि अवैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए राज्य ने प्रवर्तन ढांचे को काफ़ी मज़बूत किया है।
श्री गोयल ने कहा कि पिछली सरकारों ने पंजाब की अपार खनिज संभावनाओं को अनदेखा करते हुए अपना ध्यान मुख्य रूप से केवल खनन तक ही सीमित रखा। उन्होंने कहा कि 1989 में पंजाब में पोटाश के भंडारों की खोज होने के बावजूद, दशकों तक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस खनिज के उपयोग के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए।
उन्होंने बताया कि मान सरकार के सत्ता में आने के बाद ओडिशा और गुजरात में हुई बैठकों के दौरान केंद्र सरकार के समक्ष यह मुद्दा ज़ोरदार ढंग से उठाया गया, जहां उन्होंने स्वयं केंद्रीय मंत्री से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की और इस बात पर ज़ोर दिया कि पोटाश राष्ट्रीय महत्व का एक महत्वपूर्ण खनिज है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप केंद्र ने विस्तृत खोज के लिए लगभग 19 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं और अब 10 अन्य स्थानों पर ड्रिलिंग शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किए गए प्रारंभिक मूल्यांकनों में पोटाश की उत्साहजनक संभावनाओं के संकेत मिले हैं और विश्वास व्यक्त किया कि सफ़ल खोज से भारत की, आयातित पोटाश पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और साथ ही पंजाब के लिए आर्थिक विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
कैबिनेट मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि आधिकारिक भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में पंजाब में सोने की मौजूदगी वाले क्षेत्रों के संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की 1985-86, 1986-87, 1991-92 और 1993-94 की ऐतिहासिक रिपोर्टों में सिसवां और बुधकी नदियों के आसपास के क्षेत्रों सहित पंजाब के कुछ हिस्सों में सोने की मौजूदगी वाले क्षेत्रों का उल्लेख किया गया था।
उन्होंने बताया कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्टों में प्रारंभिक सर्वेक्षणों के दौरान एकत्रित किए गए नमूनों में सोने की उत्साहजनक मात्रा दर्ज की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य के विकास के लिए इन खनिज भंडारों की विस्तृत जांच और वैज्ञानिक मूल्यांकन करने हेतु अब आधुनिक खोज तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों द्वारा कोई विस्तृत फॉलो-अप खोज नहीं की गई, जबकि मान सरकार ने अब पोटाश और सोने दोनों खनिजों की खोज की निगरानी के लिए एक समर्पित भू-वैज्ञानिक नियुक्त किया है और सरकार खनिजों की संभावना का सही आकलन करने के लिए इस कार्य की वैज्ञानिक जांच कार्यों में पूरा सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से की गई विस्तृत खोज ही सोने के भंडारों की व्यावसायिक व्यवहार्यता के बारे में सही जानकारी प्रदान कर सकती है।
श्री गोयल ने सदन को अवगत कराया कि पंजाब में तेल की खोज की गतिविधियाँ भी प्रगति के अधीन हैं। श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा और फ़रीदकोट ज़िलों में हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज के लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय खोज एजेंसियों को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नरों और ज़िला अधिकारियों को सर्वेक्षणों में सहयोग करने और खोज कार्यों के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
खनन से अतिरिक्त आय के दावों का उल्लेख करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार पंजाब के खनिज संसाधनों के विकास के लिए समय पर सहयोग देती तो पंजाब राज्य, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री अरविंद केजरीवाल के कथन के अनुसार 20,000 करोड़ रुपए की बड़ी आय उत्पन्न कर सकता था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता की आवश्यकता संबंधी बार-बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद अभी तक कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं।














