चंडीगढ़, 28 जुलाई। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में छूट तथा निश्चित शुल्क निर्धारित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
यह निर्णय प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पंजीकृत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लाभार्थियों के लिए पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 60 वर्ग मीटर तक के पात्र आवासीय इकाइयों पर लागू होगा। स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में छूट, समयबद्ध और महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में घर खरीदने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है।
प्रस्ताव के अनुसार, पात्र आवासीय इकाइयों के लिए कन्वेयन्स डीड (स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेजों) पर प्रति दस्तावेज 500 रुपये शुल्क लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची-1ए के अनुच्छेद 23-ए, जो हरियाणा में लागू है, के अंतर्गत देय स्टांप ड्यूटी भी घटाकर 500 रुपये प्रति दस्तावेज कर दी गई है।
इस निर्णय से ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लाभार्थियों पर आवास खरीद से संबंधित लेन-देन व वित्तीय बोझ कम होगा। इससे पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत ‘‘सभी के लिए आवास’’ के लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में हरियाणा में कन्वेयन्स डीड पर भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची-1ए के अनुच्छेद 23-ए के तहत 5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी तथा 2 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देय है। यदि संपत्ति का हस्तांतरण किसी महिला के पक्ष में किया जाता है तो 2 प्रतिशत की छूट उपलब्ध है। वहीं, पंजीकरण शुल्क स्लैब के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 50,000 रुपये है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पात्र ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों के लिए किफायती आवास को बढ़ावा देने के स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में यह विशेष रियायत प्रदान कर किफायती आवास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, पात्र कन्वेयंस डीड पर स्टाम्प डयूटी पंजीकरण शुल्क में छूट को स्वीकृति प्रदान की गई है।
रेवाड़ी में बनेगी कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी
कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 में संशोधन करके, कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, रेवाड़ी नाम से एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने के लिए बिल लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई। इस एक्ट को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ (संशोधित) एक्ट, 2026 कहा जा सकता है।
राज्य के युवाओं के लिए हायर एजुकेशन के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने और उन्हें बढ़ाने की ज़रूरत है। हायर एजुकेशन में विद्यार्थियों की बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी को समायोजित करने और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 के अनुसार 50 प्रतिशत ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो के लक्ष्य को पार करने के लिए हमें 2030 तक सभी स्तर पर संस्थानों की संख्या लगभग दोगुनी करनी होगी। हायर एजुकेशन में इस बेंचमार्क को पूरा करने के लिए सरकारी दखल काफी नहीं होगा। हमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बड़े पैमाने पर शामिल करने की ज़रूरत है। हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 असल में हायर एजुकेशन में कैपेसिटी बढ़ाने और इसके स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने में सरकार की पहल को सहयोग करने के लिए प्राइवेट सेक्टर को शामिल करने के लिए लाया गया है।
अधिनियम अनुसार उद्देश्य को पाने के लिए मंत्री परिषद ने रेवाड़ी में कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए एक बिल लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।
हरियाणा में बनेगा लोकल ऑडिट एक्ट, 2026
मीटिंग में हरियाणा लोकल ऑडिट एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट को मंज़ूरी दी गई। प्रस्तावित एक्ट का उद्देश्य राज्य में सभी लोकल अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटी बॉडी, इंस्टीट्यूशन और फंड के लिए एक प्रभावी और कुशल ऑडिट कानून बनाना है तथा इससे या इनसे जुड़े मामलों के लिए भी प्रावधान करना है।
कई राज्यों के लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट (जिसे लोकल फंड डिपार्टमेंट भी कहा जाता है) के अपने अधिनियम और नियम हैं। जैसे, तमिलनाडु लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 2014, तमिलनाडु लोकल फंड ऑडिट रूल्स, 2016, गुजरात लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 1963, गुजरात लोकल फंड ऑडिट रूल्स, 1974, केरल लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 1994 आदि।
भारत के दूसरे राज्यों के लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट के एक्ट/रूल्स और लोकल फण्ड डिपार्टमेंट हरियाणा के कामकाज को देखते हुए सभी लोकल अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटीज, बॉडी या इंस्टीट्यूशन और उनसे जुड़े फंड और मामलों के लिए प्रभावी और कुशल ऑडिट सिस्टम बनाने के लिए विभाग को एक एक्ट तैयार करने की भी ज़रूरत है।
एक खास लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट एक्ट बनाने का मुख्य उद्देश्य एक मज़बूत कानूनी ढांचा तैयार करना है जो लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट को लोकल बॉडी और दूसरे लोकल फंड वाली इंस्टीट्यूशन का स्वतन्त्र रूप और प्रभावी करने का अधिकार देता है। ऑडिटर के सामने रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर करने या जवाबदेही तय करने हेतू मज़बूत कानूनी शक्तियों की ज़रूरत है। लोकल अथॉरिटीज़ को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी सिस्टम बनाना है तकि ऑडिट पैरा का तय समय में जवाब दें सके।
यह अधिनियम लोकल ऑडिट के डायरेक्टर को वितिय गड़बड़ियों के लिए सीधे ज़िम्मेदार लोगों को सरचार्ज नोटिस जारी करने का कानूनी अधिकार देगा। यह एक्ट ऑडिट फ्रेमवर्क को लोकल पॉलिटिकल या एडमिनिस्ट्रेटिव दखल से बचाने के लिए कानूनी सपोर्ट देगा। यह राज्य विधानसभा को सालाना ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के लिए कानूनी समय सीमा तय करता है, जिससे पारदर्शी सुनिश्चित होती है।














